

बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां हॉस्टल में पढ़ने वाली आठवीं क्लास की छात्रा मां बन गई और उसने बच्ची को जन्म दिया। इस मामले के सामने आने के बाद हॉस्टल में हड़कंप मच गया और लापरवाही बरतने के आरोप में हॉस्टल अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती एक साढ़े 13 साल की नाबालिग छात्रा ने बालिका को जन्म दिया है। छात्रा जिले के गढ़ी थाना अंतर्गत ग्राम परसामऊ रहवासी छात्रावास में पढ़ाई कर रही थी। छात्रावास की एक साढ़े तेरह वर्षीय नाबालिग छात्रा द्वारा एक बच्ची को जन्म देने से हॉस्टल वार्डन और एएनएम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि हॉस्टल में रहने वाली बच्ची के प्रेग्नेंट होने की जानकारी दोनों को कैसे नहीं लगी?
मिली जानकारी के मुताबिक, यह रहवासी छात्रावास जिला शिक्षा केंद्र के अधीन संचालित होता है। डीपीसी जीपी बर्मन ने इस मामले में हॉस्टल वार्डन और एएनएम की लापरवाही स्वीकार करते हुए बताया कि उन्हें जानकारी में वार्डन ने अवगत कराया कि आठवीं कक्षा में पढ़ रही पीड़ित छात्रा की तबीयत ठीक नहीं रहती थी और वह ज्यादातर समय अपने घर पर ही रहती थी। विगत 13 मार्च को अपने घर गई थी और जुलाई में आई थी। वह कुछ दिन ही रहती और अपने घर चली जाती थी। उसने परिजनों के साथ पुलिस में जो बयान दिया है उसके मुताबिक, पीड़ित छात्रा के उसी गांव के नाबालिग युवक से संबंध थे। अब उसने बालिका को जन्म दिया है।
महिला थाना प्रभारी किरण वरकड़े ने भी डीपीसी के बयान की पुष्टि दूरभाष पर की है। फिलहाल पीड़ित छात्रा और नवजात बच्ची स्वस्थ हैं और जिला चिकित्सालय के ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं। इस प्रकरण से हॉस्टल वार्डन और एएनएम जो हॉस्टल में बच्चों का समय समय पर उपचार करते थे, कि कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि हॉस्टल में रहने वाली इस नाबालिग छात्रा के गर्भवती होने की भनक उन्हें क्यों नहीं लगी।
इस मामले में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास परसामउ की अधीक्षिका चैनबती सैयाम पर निलंबन की कार्यवाही हुई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय सहायक परियोजना प्रशासक एकीकृत जनजातीय कार्य परियोजना बैहर निर्धारित किया गया है।
(इनपुट: बालाघाट से शौकत बिसाने)
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