Jaya Ekadashi 2026:: जया (अजा) एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?

Magha Shukla Ekadashi 2026: जया (अजा) एकादशी हिन्दू कैलेंडर के अनुसार एक महत्वपूर्ण उपव्रत और व्रत का दिन है,
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    भगवान विष्णु की पूजा का फोटो

    Magha Shukla Ekadashi 2026: जया (अजा) एकादशी हिन्दू कैलेंडर के अनुसार एक महत्वपूर्ण उपव्रत और व्रत का दिन है, जो विशेष रूप से भक्तों द्वारा भगवान विष्णु की पूजा और पापों के नाश के लिए मनाया जाता है। यह एकादशी हिन्दू माह के माघ मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, और इसे विशेष रूप से पापों के नाश और पुण्य की प्राप्ति का दिन माना जाता है।ALSO READ: कौन था मायावी कालनेमि? योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद क्यों छिड़ी है सनातन पर नई बहस?

     

    1. कब रखा जाएगा जया (अजा) एकादशी व्रत
    2. जया एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त
    3. जया एकादशी पारण का समय
    4. जया (अजा) एकादशी का महत्व
    5. जया (अजा) एकादशी-FAQs

     

    जया एकादशी का व्रत विशेष रूप से स्वास्थ्य, समृद्धि, और मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन उपवास रखने से व्यक्ति को न केवल मोक्ष की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में आ रहे विघ्न और दुखों से भी मुक्ति मिलती है। 

     

    कब रखा जाएगा जया (अजा) एकादशी व्रत

    29 या 30 जनवरी, किस दिन मनाई जाएगी जया (अजा) एकादशी। तो आपको बता दें कि वर्ष 2026 में माघ, शुक्ल एकादशी के दिन पड़ने वाला जया (अजा) एकादशी व्रत 29 जनवरी 2026, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। 

    जया एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त 

     

    जया एकादशी बृहस्पतिवार, जनवरी 29, 2026 को

    माघ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारम्भ- 28 जनवरी 2026 को 04:35 पी एम बजे

    एकादशी तिथि का समापन- 29 जनवरी 2026 को 01:55 पी एम बजे होगा।

     

    जया एकादशी पारण का समय

    व्रत-पारण (व्रत तोड़ने का) समय- 30 जनवरी को 07:10 ए एम से 09:20 ए एम।

    पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- 11:09 ए एम।

     

    जया (अजा) एकादशी का महत्व

     

    जया (अजा) एकादशी का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत अधिक है। इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु के भक्तों द्वारा पूजा जाता है, क्योंकि इस दिन उपवास रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जया एकादशी का व्रत करने से शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है, और भक्तों को संसारिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है।

     

    यह एकादशी पापों को नष्ट करने वाली मानी जाती है, और इसे 'पाप नाशिनी' के रूप में भी जाना जाता है। जया एकादशी का व्रत न केवल भक्तों को मानसिक शांति और सुख प्रदान करता है, बल्कि इससे एकत्रित पुण्य के कारण जीवन में सौभाग्य और समृद्धि भी आती है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

    जया (अजा) एकादशी- FAQs

     

    Q1: जया (अजा) एकादशी कब मनाई जाती है?

    उत्तर: जया (अजा) एकादशी माघ शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। यह तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल बदलती रहती है, लेकिन यह आमतौर पर जनवरी-फरवरी के बीच आती है।

     

    Q2: जया एकादशी का व्रत रखने का क्या महत्व है?

    उत्तर: जया एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, और व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख, समृद्धि, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन है।

     

    Q3: क्या जया एकादशी पर उपवास रखना जरूरी है?

    उत्तर: जया एकादशी पर उपवासी रहना या फलाहार करना आवश्यक है। व्रति पूरे दिन केवल फल, दूध या पानी का सेवन करते हैं।

     

    Q4: जया एकादशी का व्रत कौन कर सकता है?

    उत्तर: जया एकादशी का व्रत कोई भी व्यक्ति कर सकता है, लेकिन यह विशेष रूप से भगवान विष्णु के भक्तों और उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो पापों से मुक्ति चाहते हैं या जिनकी मनोकामनाएं पूरी नहीं हो रही होती हैं।

     

    Q5: जया एकादशी पर कौन से मंत्र का जाप करें?

    उत्तर: जया एकादशी पर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवा' और 'ॐ विष्णवे नमः' का जाप विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इन मंत्रों के जाप से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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